संक्षिप्त विवरण: ईरान-अमेरिका तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल के बीच भारतीय शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों दबाव में आ गए, जिससे निवेशकों में डर का माहौल बन गया।
30 अप्रैल 2026 को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट दर्ज की गई। सुबह कारोबार की शुरुआत से ही बाजार दबाव में नजर आया और दिन बढ़ने के साथ गिरावट और गहरी होती गई।
रिपोर्ट के मुताबिक, सेंसेक्स करीब 900 अंकों तक टूट गया, जबकि निफ्टी भी 300 अंकों से ज्यादा गिरकर 23,800 के आसपास पहुंच गया।
क्यों आई बाजार में गिरावट?
1. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं, जिससे निवेशकों में चिंता बढ़ गई है।
वैश्विक स्तर पर तेल 4 साल के उच्च स्तर तक पहुंच गया है, जिससे महंगाई और लागत बढ़ने का डर है।
2. ईरान-अमेरिका तनाव
ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव और Hormuz क्षेत्र में अनिश्चितता के कारण वैश्विक बाजारों में नकारात्मक असर पड़ा है।
3. अमेरिकी फेड का सख्त रुख
अमेरिकी फेडरल रिजर्व के सख्त संकेतों और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है।
4. रुपये में कमजोरी
भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब पहुंच गया, जिससे आयात महंगा हुआ और बाजार पर दबाव बढ़ा।
5. विदेशी निवेशकों की बिकवाली (FII Selling)
विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से बाजार में गिरावट और तेज हो गई।
6. लंबी छुट्टी का असर
1 मई (महाराष्ट्र दिवस) और वीकेंड की लंबी छुट्टी के चलते निवेशक अपनी पोजीशन घटा रहे हैं, जिससे गिरावट बढ़ी।
सेक्टर पर असर
- बैंकिंग सेक्टर सबसे ज्यादा प्रभावित
- ऑटो, रियल्टी और फाइनेंशियल शेयरों में गिरावट
- मिडकैप और स्मॉलकैप शेयर भी दबाव में
वैश्विक बाजार का हाल
- एशियाई बाजारों में भी गिरावट
- वॉल स्ट्रीट में भी कमजोरी
- तेल संकट के कारण दुनिया भर के बाजार दबाव में
तथ्य जाँच (मुख्य बिंदु)
- सेंसेक्स करीब 900–1100 अंक तक गिरा।
- निफ्टी 300 अंक से ज्यादा फिसलकर 23,800 के आसपास पहुंचा।
- कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल के पार।
- ईरान-अमेरिका तनाव से बाजार पर दबाव।
- रुपया रिकॉर्ड निचले स्तर के करीब।
- विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी।
- कई सेक्टरों में भारी गिरावट दर्ज।
- वैश्विक बाजारों का नकारात्मक असर भारत पर पड़ा।
