बड़ी खबर: भारत में पॉलीमर (प्लास्टिक) करेंसी नोट लाने की योजना एक बार फिर आगे बढ़ी है। करीब 15 साल से लंबित इस प्रस्ताव पर केंद्र सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) को ₹10 और ₹20 के पॉलीमर नोटों के फील्ड ट्रायल की मंजूरी दे दी है। हालांकि, सरकार ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल मौजूदा कागजी नोटों को पूरी तरह हटाने की कोई योजना नहीं है।
सरकार के अनुसार, शुरुआती चरण में करीब 200 करोड़ पॉलीमर नोट छापे जाएंगे, जिनमें ₹10 और ₹20 मूल्यवर्ग के नोट शामिल होंगे। इन नोटों का विभिन्न क्षेत्रों में परीक्षण किया जाएगा ताकि उनकी मजबूती, टिकाऊपन और व्यवहारिक उपयोग का आकलन किया जा सके।
पॉलीमर नोट सामान्य कागजी नोटों की तुलना में अधिक टिकाऊ माने जाते हैं। ये पानी से जल्दी खराब नहीं होते, फटने की संभावना कम रहती है और इनमें आधुनिक सुरक्षा फीचर्स जोड़े जा सकते हैं, जिससे नकली नोटों पर रोक लगाने में मदद मिलती है। ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, ब्रिटेन और कई अन्य देशों में पहले से ही पॉलीमर करेंसी का इस्तेमाल किया जा रहा है।
यह योजना पहली बार करीब 15 वर्ष पहले प्रस्तावित की गई थी, लेकिन विभिन्न कारणों से आगे नहीं बढ़ सकी। अब सरकार और RBI ने इसे सीमित स्तर पर दोबारा शुरू करने का फैसला लिया है। ट्रायल के नतीजों के आधार पर भविष्य में आगे की रणनीति तय की जाएगी।
तथ्य जांच:
- केंद्र सरकार ने RBI को ₹10 और ₹20 के पॉलीमर नोटों के फील्ड ट्रायल की मंजूरी दी है।
- शुरुआती चरण में लगभग 200 करोड़ पॉलीमर नोट छापे जाएंगे।
- फिलहाल कागजी नोटों को पूरी तरह बंद करने की कोई योजना नहीं है।
- पॉलीमर नोट अधिक टिकाऊ, सुरक्षित और नकली नोटों के खिलाफ बेहतर माने जाते हैं।
निष्कर्ष:
भारत में पॉलीमर करेंसी नोटों का ट्रायल देश की मुद्रा व्यवस्था को अधिक सुरक्षित और टिकाऊ बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। हालांकि, यह अभी केवल परीक्षण चरण में है और कागजी नोट फिलहाल प्रचलन में बने रहेंगे।
