बड़ी खबर: रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर अमेरिका द्वारा 100% तक टैरिफ लगाने के प्रस्ताव के बीच भारत ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत इस प्रस्तावित अमेरिकी कानून पर करीबी नजर बनाए हुए है और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखते हुए उचित कदम उठाएगा।
रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत ने अभी तक प्रस्तावित विधेयक का विस्तृत अध्ययन नहीं किया है, लेकिन सरकार इसकी प्रगति पर लगातार नजर रख रही है। उन्होंने दोहराया कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता देता है तथा तेल आयात से जुड़े फैसले इन्हीं आधारों पर लिए जाते हैं।
अमेरिका में प्रस्तावित इस विधेयक के तहत भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अज़रबैजान जैसे रूसी कच्चे तेल के बड़े खरीदार देशों पर अधिकतम 100% टैरिफ लगाने का प्रावधान रखा गया है। इससे पहले प्रारंभिक मसौदे में 500% टैरिफ का प्रस्ताव था, जिसे बाद में घटाकर 100% कर दिया गया। यह विधेयक अभी प्रस्तावित है और इसे लागू होने से पहले अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी आवश्यक होगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह कानून पारित होता है तो इसका असर वैश्विक ऊर्जा व्यापार और भारत-अमेरिका व्यापारिक संबंधों पर पड़ सकता है। हालांकि फिलहाल यह केवल एक प्रस्तावित विधेयक है और इसके अंतिम स्वरूप तथा लागू होने को लेकर कोई आधिकारिक निर्णय नहीं हुआ है।
तथ्य जांच:
- भारत ने कहा है कि वह अमेरिकी प्रस्तावित कानून पर करीबी नजर रख रहा है।
- प्रस्तावित विधेयक में रूसी तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों पर 100% तक टैरिफ का प्रावधान है।
- प्रारंभिक 500% टैरिफ प्रस्ताव को संशोधित कर 100% किया गया है।
- यह विधेयक अभी लागू नहीं हुआ है और अमेरिकी कांग्रेस की प्रक्रिया से गुजरना बाकी है।
निष्कर्ष:
रूसी तेल आयात को लेकर अमेरिका के प्रस्तावित टैरिफ कानून पर भारत ने संतुलित रुख अपनाया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह स्थिति पर नजर रखे हुए है और किसी भी निर्णय में राष्ट्रीय हित तथा ऊर्जा सुरक्षा को प्राथमिकता दी जाएगी।
