बड़ी खबर: अग्निपथ योजना के तहत भर्ती किए गए अग्निवीरों को भविष्य में अधिक संख्या में स्थायी सेवा का अवसर मिल सकता है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, तीनों सेनाएं वर्तमान 25% रिटेंशन की सीमा बढ़ाने के प्रस्ताव पर विचार कर रही हैं। अंतिम निर्णय सरकार और रक्षा मंत्रालय के स्तर पर लिया जाएगा।
दिनांक: 6 जुलाई 2026
स्थान: नई दिल्ली
रिपोर्टों के अनुसार, अग्निपथ योजना के तहत भर्ती पहले बैच के अग्निवीर इस वर्ष अपना चार वर्षीय कार्यकाल पूरा करेंगे। इसी को देखते हुए सेना, नौसेना और वायुसेना अपने अनुभवों के आधार पर अधिक प्रशिक्षित अग्निवीरों को नियमित सेवा में बनाए रखने के पक्ष में विचार कर रही हैं।
बताया जा रहा है कि भारतीय नौसेना तकनीकी शाखाओं में अधिक रिटेंशन की पक्षधर है, जबकि सेना और वायुसेना भी वर्तमान व्यवस्था में बदलाव की जरूरत महसूस कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि आधुनिक हथियार प्रणालियों और नई तकनीकों पर प्रशिक्षित जवानों को लंबे समय तक सेवा में रखना संचालन क्षमता को मजबूत करेगा।
हालांकि, फिलहाल आधिकारिक नीति में कोई बदलाव नहीं किया गया है। मौजूदा नियमों के अनुसार, चार वर्ष की सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों में से अधिकतम 25 प्रतिशत को ही नियमित कैडर में शामिल किया जाता है। प्रस्ताव पर अंतिम निर्णय सरकार द्वारा समीक्षा के बाद लिया जाएगा।
तथ्य जांच:
- तीनों सेनाएं अग्निवीरों की रिटेंशन दर बढ़ाने पर विचार कर रही हैं।
- वर्तमान नीति के अनुसार अधिकतम 25% अग्निवीरों को स्थायी सेवा में रखा जाता है।
- पहला अग्निवीर बैच 2026 में चार वर्ष की सेवा पूरी करेगा।
- सरकार की ओर से अभी किसी बदलाव की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
निष्कर्ष:
अग्निपथ योजना में अग्निवीरों की स्थायी भर्ती बढ़ाने को लेकर मंथन जारी है। यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो भविष्य में अधिक अग्निवीरों को नियमित सैन्य सेवा का अवसर मिल सकता है। फिलहाल अंतिम निर्णय का इंतजार है।
