बड़ी खबर: CJP के 'चलो संसद' आंदोलन के दौरान छात्रों और प्रदर्शनकारियों पर हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर AIMIM प्रमुख एवं सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि छात्रों पर लाठीचार्ज और बल प्रयोग लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है तथा सरकार को युवाओं की आवाज़ सुननी चाहिए, न कि उसे दबाना चाहिए।
ओवैसी ने मीडिया से बातचीत में कहा कि "कल जो हुआ, वह बहुत गलत हुआ।" उन्होंने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण विरोध कर रहे छात्रों के साथ जिस तरह का व्यवहार किया गया, वह लोकतंत्र के लिए चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि देश में असहमति व्यक्त करना अपराध नहीं है और सरकार को विरोध की आवाज़ का सम्मान करना चाहिए।
AIMIM प्रमुख ने अपने बयान में CAA विरोध प्रदर्शन और जामिया मिल्लिया इस्लामिया की घटनाओं का भी उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय भी छात्रों के साथ बल प्रयोग हुआ था। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों को भुलाया नहीं जाना चाहिए और सरकार को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि भविष्य में छात्रों के साथ इस प्रकार की कार्रवाई दोबारा न हो।
इस बीच संसद मार्च के दौरान हुई झड़पों के बाद दिल्ली पुलिस का कहना है कि प्रदर्शनकारियों ने निषेधाज्ञा का उल्लंघन किया, जिसके बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए कार्रवाई की गई। दूसरी ओर CJP का आरोप है कि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण था और पुलिस ने अनावश्यक बल प्रयोग किया। मामले को लेकर सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत जारी है।
विपक्ष के कई नेताओं के बाद अब असदुद्दीन ओवैसी के बयान से भी संसद मार्च को लेकर राजनीतिक बहस और तेज हो गई है। शिक्षा व्यवस्था, परीक्षा सुधार और छात्रों के अधिकारों को लेकर विपक्ष लगातार केंद्र सरकार पर सवाल उठा रहा है।
तथ्य जांच:
- असदुद्दीन ओवैसी ने छात्रों पर लाठीचार्ज की आलोचना की।
- उन्होंने CAA और जामिया से जुड़े पुराने घटनाक्रम का भी उल्लेख किया।
- CJP और दिल्ली पुलिस ने संसद मार्च की घटनाओं को लेकर अलग-अलग दावे किए हैं।
- सरकार और CJP प्रतिनिधियों के बीच वार्ता जारी है।
निष्कर्ष:
संसद मार्च के दौरान हुई पुलिस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक बयानबाज़ी लगातार तेज हो रही है। असदुद्दीन ओवैसी ने इसे लोकतंत्र और छात्रों के अधिकारों से जुड़ा मुद्दा बताते हुए सरकार से जवाबदेही तय करने की मांग की है।
