बड़ी खबर: भारत अब केवल कर्ज लेने वाला देश नहीं, बल्कि कई विकासशील देशों को ऋण (Loan) और विकास सहायता (Development Assistance) देने वाले प्रमुख देशों में शामिल हो चुका है। सरकार विभिन्न परियोजनाओं के लिए एशिया, अफ्रीका और पड़ोसी देशों को रियायती दरों पर वित्तीय सहायता उपलब्ध कराती है। भारत की सहायता पाने वाले देशों में भूटान, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, मालदीव, मॉरीशस, मंगोलिया समेत कई अन्य देश शामिल हैं।
भारत मुख्य रूप से लाइन ऑफ क्रेडिट (Line of Credit), विकास परियोजनाओं और बुनियादी ढांचा निर्माण के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करता है। इन योजनाओं का उद्देश्य मित्र देशों के साथ आर्थिक सहयोग बढ़ाना और क्षेत्रीय विकास को गति देना है।
रिपोर्टों के अनुसार, भूटान भारत से सबसे अधिक आर्थिक सहायता और विकास वित्त प्राप्त करने वाले देशों में शामिल है। भारत ने वहां सड़क, जलविद्युत परियोजनाओं, शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में बड़े पैमाने पर निवेश और वित्तीय सहयोग किया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह नीति केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि पड़ोसी देशों और रणनीतिक साझेदारों के साथ मजबूत संबंध बनाने की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। इससे भारत की वैश्विक आर्थिक और कूटनीतिक स्थिति लगातार मजबूत हो रही है।
तथ्य जांच:
- भारत कई देशों को ऋण और विकास सहायता प्रदान करता है।
- सहायता प्राप्त करने वाले प्रमुख देशों में भूटान, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका और मालदीव शामिल हैं।
- भूटान भारत से सबसे अधिक विकास सहायता प्राप्त करने वाले देशों में प्रमुख है।
- भारत यह सहायता मुख्य रूप से विकास परियोजनाओं और लाइन ऑफ क्रेडिट के माध्यम से देता है।
निष्कर्ष:
भारत की बढ़ती आर्थिक क्षमता का असर उसकी वैश्विक भूमिका पर भी दिखाई दे रहा है। आज भारत कई देशों को वित्तीय सहायता और विकास ऋण उपलब्ध कराकर क्षेत्रीय सहयोग और अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
