बड़ी खबर: संसद के मानसून सत्र से पहले कांग्रेस ने अपनी रणनीति स्पष्ट कर दी है। कांग्रेस की पार्लियामेंट्री स्ट्रेटजी कमेटी और शीर्ष नेतृत्व की बैठक के बाद पार्टी ने घोषणा की कि यदि केंद्र सरकार संविधान संशोधन, परिसीमन (Delimitation) विधेयक, वन नेशन-वन इलेक्शन, FCRA संशोधन और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में बदलाव से जुड़े विधेयक लाती है, तो उनका पुरजोर विरोध किया जाएगा।
बैठक के बाद कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि सरकार ने अभी तक आधिकारिक रूप से मानसून सत्र में पेश होने वाले विधेयकों की सूची साझा नहीं की है। इसी कारण संभावित विधेयकों पर विस्तृत चर्चा की गई। कांग्रेस ने कहा कि 19 जुलाई को होने वाली सर्वदलीय बैठक में सरकार से विधेयकों की पूरी जानकारी मांगी जाएगी। साथ ही पार्टी ने केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग भी दोहराई।
कांग्रेस ने आरोप लगाया कि यदि सरकार परिसीमन या संविधान संशोधन से जुड़े विधेयक लाती है, तो उनका उद्देश्य राजनीतिक लाभ हासिल करना होगा। पार्टी का कहना है कि वह इन मुद्दों पर विपक्षी दलों को एकजुट कर सरकार का विरोध करेगी। जयराम रमेश ने आरोप लगाया कि भाजपा राजनीतिक दलों को तोड़कर लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत हासिल करने की कोशिश कर रही है, जो संविधान की भावना के विपरीत है।
कांग्रेस ने यह भी कहा कि सर्वदलीय बैठक अब केवल औपचारिकता बनकर रह गई है, क्योंकि विपक्ष की राय को गंभीरता से नहीं लिया जाता। पार्टी ने संकेत दिया कि मानसून सत्र के दौरान इन मुद्दों पर सरकार को संसद के भीतर और बाहर घेरा जाएगा।
तथ्य जांच:
- कांग्रेस ने संविधान संशोधन और परिसीमन विधेयक का विरोध करने का ऐलान किया।
- 'वन नेशन-वन इलेक्शन', FCRA संशोधन और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में बदलाव का भी विरोध किया जाएगा।
- 19 जुलाई की सर्वदलीय बैठक में सरकार से विधेयकों की जानकारी मांगी जाएगी।
- कांग्रेस विपक्षी दलों को इन मुद्दों पर एकजुट करने की कोशिश करेगी।
निष्कर्ष:
मानसून सत्र शुरू होने से पहले ही सरकार और विपक्ष के बीच टकराव के संकेत मिल गए हैं। कांग्रेस ने कई संभावित विधेयकों पर विरोध का रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि संसद का आगामी सत्र राजनीतिक रूप से बेहद गर्म रहने वाला है।
