रथ यात्रा को लेकर बढ़ा विवाद, कलिंग सेना ने ISKCON को दी कड़ी चेतावनी

NRC News Hindi: रथ यात्रा को लेकर बढ़ा विवाद, कलिंग सेना ने ISKCON को दी कड़ी चेतावनी

बड़ी खबर: ओडिशा में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा को लेकर विवाद गहरा गया है। सामाजिक और राजनीतिक संगठन कलिंग सेना ने ISKCON पर परंपरा और धार्मिक रीति-रिवाजों से अलग समय पर रथ यात्रा निकालने का आरोप लगाते हुए कड़ी चेतावनी दी है। संगठन ने ओडिशा के लोगों से ISKCON की गतिविधियों का विरोध करने की अपील भी की है।

दिनांक: 11 जुलाई 2026
स्थान: भुवनेश्वर, ओडिशा

भुवनेश्वर में कलिंग सेना के कार्यकर्ताओं ने ISKCON मंदिर के बाहर प्रदर्शन किया। संगठन का आरोप है कि ISKCON भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निर्धारित पारंपरिक तिथि के बजाय अलग समय पर आयोजित कर रहा है, जिससे ओडिशा की धार्मिक परंपराओं का उल्लंघन हो रहा है।

कलिंग सेना के अध्यक्ष हेमंत रथ ने कहा कि कई बार अपील के बावजूद ISKCON ने अपनी कार्यशैली में बदलाव नहीं किया। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि संगठन ने समय से पहले रथ यात्रा निकालना बंद नहीं किया, तो पूरे ओडिशा में उसके कार्यक्रमों का विरोध किया जाएगा।

रिपोर्ट के अनुसार, कलिंग सेना ने यह भी कहा कि 16 जुलाई को होने वाली रथ यात्रा के दौरान ISKCON के अनुयायी पुरी न आएं। संगठन ने आरोप लगाया कि ISKCON ने पुरी के गजपति महाराजा की अपील का भी सम्मान नहीं किया, जिन्हें भगवान जगन्नाथ का प्रथम सेवक माना जाता है।

दूसरी ओर, ISKCON का कहना है कि उसकी भुवनेश्वर शाखा पुरी मंदिर की परंपरा के अनुरूप ही रथ यात्रा का आयोजन करती रही है और यह कार्यक्रम कई दशकों से आयोजित किया जा रहा है।

इस विवाद के बाद ओडिशा में धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं को लेकर बहस तेज हो गई है। प्रशासन की ओर से फिलहाल कानून-व्यवस्था बनाए रखने पर नजर रखी जा रही है।

तथ्य जांच:

  • कलिंग सेना ने ISKCON के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।
  • संगठन ने गलत समय पर रथ यात्रा निकालने का आरोप लगाया।
  • 16 जुलाई की रथ यात्रा के दौरान ISKCON सदस्यों को पुरी न आने की चेतावनी दी गई।
  • ISKCON का कहना है कि वह परंपरा के अनुरूप ही रथ यात्रा आयोजित करता है।
  • मामले को लेकर ओडिशा में धार्मिक और सांस्कृतिक बहस तेज हो गई है।

निष्कर्ष:

भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा को लेकर कलिंग सेना और ISKCON के बीच विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। दोनों पक्ष अपनी-अपनी परंपराओं और दावों पर कायम हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में प्रशासन और संबंधित पक्षों की भूमिका इस विवाद के समाधान में महत्वपूर्ण रहेगी।

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