बड़ी खबर: संसद के 20 जुलाई से शुरू होने वाले मानसून सत्र से पहले कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संशोधित प्रस्तावों पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की है। खरगे ने कहा कि ऐसे महत्वपूर्ण विधेयकों को संसद में पेश करने से पहले सभी राजनीतिक दलों से विस्तृत चर्चा होनी चाहिए।
अपने पत्र में खरगे ने कहा कि उन्होंने पहले भी संसदीय कार्य मंत्री से परिसीमन और अन्य संवैधानिक प्रस्तावों पर सर्वदलीय बैठक बुलाने का अनुरोध किया था, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने दावा किया कि सरकार अब संविधान (131वां संशोधन) विधेयक को संशोधित रूप में फिर से संसद में लाने की तैयारी कर रही है, इसलिए पहले सभी दलों को प्रस्तावों का अध्ययन करने और अपनी राय रखने का पर्याप्त अवसर दिया जाना चाहिए।
कांग्रेस का कहना है कि वह महिला आरक्षण का समर्थन करती है, लेकिन इसे परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ने पर आपत्ति रखती है। पार्टी का आरोप है कि सरकार इस मुद्दे पर व्यापक राजनीतिक सहमति बनाने के बजाय जल्दबाजी में आगे बढ़ रही है। इसी वजह से कांग्रेस ने मानसून सत्र में परिसीमन विधेयक समेत कई प्रस्तावित विधेयकों का विरोध करने का फैसला किया है।
कांग्रेस ने यह भी संकेत दिया है कि यदि सरकार इन विधेयकों को संसद में लाती है, तो विपक्ष इस मुद्दे पर एकजुट होकर सरकार को घेरने की कोशिश करेगा। पार्टी का कहना है कि लोकतांत्रिक और संघीय ढांचे से जुड़े ऐसे फैसलों पर व्यापक चर्चा और सहमति आवश्यक है।
तथ्य जांच:
- मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर सर्वदलीय बैठक बुलाने की मांग की।
- मांग महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े संशोधित प्रस्तावों पर चर्चा के लिए की गई है।
- कांग्रेस ने महिला आरक्षण का समर्थन, लेकिन परिसीमन से जोड़ने का विरोध दोहराया।
- मानसून सत्र 20 जुलाई से शुरू होना है।
निष्कर्ष:
मानसून सत्र से पहले महिला आरक्षण और परिसीमन का मुद्दा फिर राजनीतिक केंद्र में आ गया है। कांग्रेस सरकार से सर्वदलीय सहमति बनाने की मांग कर रही है, जबकि इस विषय पर संसद में तीखी बहस होने के संकेत मिल रहे हैं।
