बड़ी खबर: CJP आंदोलन और छात्रों पर हुई कथित पुलिस कार्रवाई के विरोध में प्रधानमंत्री आवास की ओर निकले विपक्षी नेताओं राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में ले लिया। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन को बलपूर्वक रोका गया, जबकि पुलिस का कहना है कि निषेधाज्ञा लागू होने के कारण प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती थी।
कांग्रेस और INDIA गठबंधन के कई नेता प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च कर रहे थे। उनका कहना था कि वे छात्रों पर कथित लाठीचार्ज, NEET पेपर लीक और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर प्रधानमंत्री से जवाब मांगना चाहते हैं। पुलिस ने लोक कल्याण मार्ग के पास बैरिकेडिंग कर मार्च को रोक दिया। इसके बाद कई नेताओं को हिरासत में लेकर प्रदर्शन स्थल से हटाया गया।
राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि छात्रों के साथ हुई पुलिस कार्रवाई "पूरी तरह अलोकतांत्रिक" है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस मुद्दे पर देश से माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं की आवाज़ को दबाने के बजाय उनकी समस्याओं का समाधान किया जाना चाहिए।
प्रियंका गांधी ने कहा कि प्रदर्शन कर रहे छात्र देश का भविष्य हैं और उनके साथ अपराधियों जैसा व्यवहार नहीं होना चाहिए। वहीं अखिलेश यादव ने भी छात्रों के समर्थन में केंद्र सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि शिक्षा और रोजगार से जुड़े मुद्दों पर गंभीर चर्चा होनी चाहिए, न कि विरोध करने वालों को रोका जाए।
दिल्ली पुलिस ने कहा कि सुरक्षा कारणों और लागू प्रतिबंधों को देखते हुए प्रदर्शनकारियों को प्रधानमंत्री आवास की ओर बढ़ने से रोका गया। पुलिस के अनुसार कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कार्रवाई की गई। उधर विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का दमन बताते हुए आंदोलन जारी रखने की बात कही है।
तथ्य जांच:
- राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अन्य विपक्षी नेताओं को प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च के दौरान पुलिस ने रोका और हिरासत में लिया।
- विपक्ष ने छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और NEET पेपर लीक को लेकर सरकार को घेरा।
- दिल्ली पुलिस ने कार्रवाई को सुरक्षा और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक बताया।
- विपक्ष ने आंदोलन जारी रखने और छात्रों के मुद्दे संसद में उठाने की बात कही।
निष्कर्ष:
प्रधानमंत्री आवास की ओर निकले विपक्षी नेताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद CJP आंदोलन और छात्रों के मुद्दे पर राजनीतिक टकराव और तेज हो गया है। संसद के भीतर और बाहर यह मुद्दा फिलहाल राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में बना हुआ है।
