दतिया मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग अधीक्षक की नियुक्ति निरस्त, हाईकोर्ट ने 10 अतिरिक्त अंकों को माना नियम विरुद्ध

NRC News Hindi: दतिया मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग अधीक्षक की नियुक्ति निरस्त, हाईकोर्ट ने 10 अतिरिक्त अंकों को माना नियम विरुद्ध

बड़ी खबर: मध्य प्रदेश के दतिया स्थित शासकीय मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग अधीक्षक के पद पर हुई नियुक्ति को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने निरस्त कर दिया है। अदालत ने चयन प्रक्रिया में भर्ती विज्ञापन की शर्तों से बाहर जाकर PhD की डिग्री के लिए दिए गए 10 अतिरिक्त अंकों को नियम विरुद्ध और मनमाना माना। अदालत के फैसले के बाद संबंधित नियुक्ति रद्द हो गई है।

दिनांक: 14 अगस्त 2026
स्थान: दतिया, मध्य प्रदेश

यह पूरा मामला वर्ष 2018 में जारी किए गए भर्ती विज्ञापन से जुड़ा है। नर्सिंग अधीक्षक के पद के लिए जारी विज्ञापन में एमएससी नर्सिंग, बीएससी नर्सिंग या पोस्ट बेसिक बीएससी नर्सिंग जैसी शैक्षणिक योग्यताएं निर्धारित की गई थीं। विज्ञापन में PhD की डिग्री के लिए अतिरिक्त अंक देने का कोई प्रावधान नहीं था।

इस भर्ती प्रक्रिया को सविता पांडेय ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। सुनवाई के दौरान अदालत के सामने यह तथ्य आया कि चयनित अभ्यर्थी विजि अवस्थी को PhD की डिग्री के आधार पर 10 अतिरिक्त अंक दिए गए थे।

इन 10 अतिरिक्त अंकों के बाद विजि अवस्थी के कुल अंक 79 हो गए थे और इसी आधार पर 9 मई 2019 को उनकी नियुक्ति की गई थी। वहीं, याचिकाकर्ता सविता पांडेय को निर्धारित शैक्षणिक योग्यता के आधार पर 75 अंक मिले थे।

हाईकोर्ट ने जब PhD के 10 अतिरिक्त अंकों को हटाकर मेरिट की स्थिति देखी तो चयनित अभ्यर्थी के अंक 79 से घटकर 69 रह गए। ऐसे में 75 अंक पाने वाली सविता पांडेय मेरिट में ऊपर आ गईं।

अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि किसी सरकारी भर्ती का विज्ञापन जारी होने और चयन प्रक्रिया शुरू होने के बाद उसके निर्धारित मानदंडों में मनमाने तरीके से बदलाव नहीं किया जा सकता। अभ्यर्थियों का मूल्यांकन उन्हीं नियमों और शर्तों के आधार पर किया जाना चाहिए, जो भर्ती विज्ञापन में पहले से निर्धारित हों।

हाईकोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि किसी उम्मीदवार के पास निर्धारित न्यूनतम योग्यता से अधिक या उच्च योग्यता होने मात्र से उसे अतिरिक्त अंक देने का अधिकार नहीं मिल जाता। यदि किसी अतिरिक्त योग्यता के लिए बोनस अंक दिए जाने हैं तो उसका स्पष्ट प्रावधान भर्ती विज्ञापन में होना जरूरी है।

अदालत ने अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट के के. मंजुश्री और संदीप श्रीराम वराडे से जुड़े फैसलों का भी उल्लेख किया। इन फैसलों के आधार पर भर्ती प्रक्रिया में पहले से तय नियमों का पालन करने की आवश्यकता पर जोर दिया गया।

इस मामले में अदालत के फैसले ने सरकारी भर्तियों में विज्ञापन की शर्तों और चयन प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर महत्वपूर्ण संदेश दिया है। अदालत ने स्पष्ट किया कि चयन प्रक्रिया के बीच में किसी अभ्यर्थी को ऐसा अतिरिक्त लाभ नहीं दिया जा सकता, जिसका उल्लेख मूल विज्ञापन में नहीं किया गया हो।

तथ्य जांच:

  • मामला दतिया के शासकीय मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग अधीक्षक पद की नियुक्ति से जुड़ा है।
  • भर्ती का मूल विज्ञापन वर्ष 2018 में जारी हुआ था।
  • चयनित अभ्यर्थी विजि अवस्थी को PhD के आधार पर 10 अतिरिक्त अंक दिए गए थे।
  • मूल भर्ती विज्ञापन में PhD के लिए अतिरिक्त अंकों का प्रावधान नहीं था।
  • अतिरिक्त अंकों के बाद विजि अवस्थी के कुल अंक 79 हुए थे।
  • याचिकाकर्ता सविता पांडेय के 75 अंक थे।
  • अतिरिक्त 10 अंक हटने पर विजि अवस्थी के अंक 69 रह जाते हैं।
  • इसके बाद सविता पांडेय की मेरिट स्थिति चयनित अभ्यर्थी से ऊपर हो जाती है।
  • हाईकोर्ट ने संबंधित नियुक्ति को निरस्त कर दिया।
  • अदालत ने कहा कि भर्ती विज्ञापन में स्पष्ट प्रावधान के बिना अतिरिक्त योग्यता के लिए बोनस अंक नहीं दिए जा सकते।

निष्कर्ष

दतिया मेडिकल कॉलेज में नर्सिंग अधीक्षक की नियुक्ति के मामले में मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भर्ती प्रक्रिया में तय नियमों की अनदेखी को गंभीर माना है। विज्ञापन में प्रावधान नहीं होने के बावजूद PhD के लिए दिए गए 10 अतिरिक्त अंकों ने पूरी मेरिट को प्रभावित किया था। हाईकोर्ट ने नियुक्ति निरस्त करते हुए स्पष्ट किया कि सरकारी भर्ती में चयन प्रक्रिया शुरू होने के बाद नियमों में मनमाना बदलाव नहीं किया जा सकता।

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