बड़ी खबर: आजादी के बाद पहली बार 15 अगस्त 2026 को लाल किले की प्राचीर पर होने वाले आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस समारोह में ‘वंदे मातरम’ का औपचारिक गायन किया जाएगा। रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने 10 अगस्त को नई दिल्ली में प्रेस ब्रीफिंग के दौरान इसकी जानकारी दी थी। यह फैसला ‘वंदे मातरम’ की रचना के 150 वर्ष पूरे होने के अवसर पर लिया गया है।
इस बार भारत 80वां स्वतंत्रता दिवस मनाएगा। 15 अगस्त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लाल किले की प्राचीर से देश को संबोधित करेंगे। आधिकारिक कार्यक्रम में ‘वंदे मातरम’ को शामिल किया जाना स्वतंत्रता दिवस समारोह के पारंपरिक क्रम में महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।
अब तक स्वतंत्रता दिवस समारोह में प्रधानमंत्री के आगमन के बाद गार्ड ऑफ ऑनर, राष्ट्रीय ध्वज फहराने, 21 तोपों की सलामी और राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के बाद प्रधानमंत्री के संबोधन की परंपरा रही है। 15 अगस्त 2026 से इस कार्यक्रम के क्रम में बदलाव किया जाएगा और ‘वंदे मातरम’ को भी औपचारिक कार्यक्रम का हिस्सा बनाया जाएगा।
‘वंदे मातरम’ को लाल किले के आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस समारोह में पहली बार शामिल करने का फैसला इसके 150 वर्ष पूरे होने के अवसर से भी जुड़ा है। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने इसकी रचना 1876 में की थी। बाद में इसे उनके उपन्यास ‘आनंदमठ’ में शामिल किया गया। 1896 में रवींद्रनाथ टैगोर ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में इसे सार्वजनिक रूप से गाया था।
24 जनवरी 1950 को संविधान सभा ने ‘वंदे मातरम’ के पहले दो अंतरों को राष्ट्रगीत का दर्जा दिया था। इसी के साथ ‘जन गण मन’ को राष्ट्रगान का दर्जा दिया गया और दोनों को समान सम्मान देने की बात कही गई थी। हालांकि स्वतंत्रता दिवस के आधिकारिक समारोह में ‘वंदे मातरम’ के गायन का निर्धारित प्रोटोकॉल अब तक नहीं था।
विवाद की वजह क्या है?
‘वंदे मातरम’ की पूरी रचना को लेकर पहले से ऐतिहासिक बहस रही है। ‘आनंदमठ’ में शामिल बाद के कुछ अंतरों में देवी स्वरूप का वर्णन मिलता है। इसी वजह से कुछ समुदायों की ओर से आपत्ति जताई गई थी। व्यापक सहमति के आधार पर राष्ट्रगीत के रूप में इसके पहले दो अंतरों को स्वीकार किया गया।
इस बार रक्षा मंत्रालय ने स्वतंत्रता दिवस समारोह के आधिकारिक प्रिंट और डिजिटल निमंत्रण पत्रों में ‘वंदे मातरम’ के सभी छह मूल छंद भी प्रकाशित किए हैं। इससे समारोह में शामिल होने वाले अतिथियों को पूरी रचना उपलब्ध होगी।
इस वर्ष के स्वतंत्रता दिवस समारोह में युवाओं को भी विशेष महत्व दिया गया है। NCC और ‘माई भारत’ प्लेटफॉर्म से चुने गए करीब 2,500 युवा लाल किले की मुख्य प्राचीर के सामने बैठेंगे और मिलकर देवनागरी में ‘वंदे मातरम’ शब्द की विशाल मानव आकृति बनाएंगे।
समारोह के दौरान भारतीय वायुसेना का Mi-17 हेलीकॉप्टर भी लाल किले के ऊपर उड़ान भरेगा। हेलीकॉप्टर के जरिए ‘150 Years of Vande Mataram’ का विशेष एरियल बैनर प्रदर्शित किया जाएगा और समारोह में मौजूद लोगों पर पुष्पवर्षा की जाएगी।
8 से 15 अगस्त तक देशभर में भी ‘वंदे मातरम’ को लेकर विशेष कार्यक्रम चल रहे हैं। सेना, नौसेना, वायुसेना, भारतीय तटरक्षक बल, CRPF, BSF, CISF, ITBP, SSB और RPF के बैंड देश के 343 स्थानों पर देशभक्ति की धुनें प्रस्तुत कर रहे हैं।
तथ्य जांच:
- 15 अगस्त 2026 को लाल किले के आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस समारोह में ‘वंदे मातरम’ का औपचारिक गायन पहली बार होगा।
- इस बदलाव की घोषणा 10 अगस्त को रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने की थी।
- वर्ष 2026 में ‘वंदे मातरम’ की रचना के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं।
- बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने इसकी रचना 1876 में की थी।
- 1882 में इसे ‘आनंदमठ’ उपन्यास में शामिल किया गया।
- 1896 में रवींद्रनाथ टैगोर ने इसे कांग्रेस के कलकत्ता अधिवेशन में सार्वजनिक रूप से गाया था।
- 24 जनवरी 1950 को इसके पहले दो अंतरों को राष्ट्रगीत का दर्जा दिया गया।
- पूरी रचना के बाद के अंतरों में देवी स्वरूप के वर्णन को लेकर ऐतिहासिक आपत्तियां रही हैं।
- 2026 के स्वतंत्रता दिवस समारोह में करीब 2,500 युवा ‘वंदे मातरम’ की मानव आकृति बनाएंगे।
- समारोह में ‘150 Years of Vande Mataram’ लिखे एरियल बैनर के साथ Mi-17 हेलीकॉप्टर पुष्पवर्षा करेगा।
निष्कर्ष
15 अगस्त 2026 का स्वतंत्रता दिवस समारोह ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूरे होने के कारण विशेष महत्व रखता है। आजादी के बाद पहली बार लाल किले के आधिकारिक स्वतंत्रता दिवस समारोह में इसे औपचारिक रूप से शामिल किया जा रहा है। राष्ट्रगीत के इतिहास और इसके कुछ अंतरों को लेकर पहले से चली आ रही बहस के बीच इस बार का आयोजन देश के स्वतंत्रता आंदोलन में ‘वंदे मातरम’ की भूमिका और उसके ऐतिहासिक सफर को भी सामने रखेगा।
