झारखंड सरकार को बड़ा झटका, JPSC समेत 22 रद्द परीक्षाओं पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

NRC News Hindi: झारखंड सरकार को बड़ा झटका, JPSC समेत 22 रद्द परीक्षाओं पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

बड़ी खबर: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे विवाद के बीच झारखंड हाईकोर्ट ने हेमंत सोरेन सरकार के उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें JPSC और एक बाहरी एजेंसी की ओर से आयोजित 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया गया था। हाईकोर्ट के इस आदेश से उन अभ्यर्थियों को बड़ी राहत मिली है, जो सरकार के फैसले के खिलाफ अदालत पहुंचे थे।

दिनांक: 20 अगस्त 2026
स्थान: रांची, झारखंड

झारखंड सरकार ने 18 अगस्त को अधिसूचना जारी कर झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) और एक बाहरी एजेंसी की ओर से आयोजित 22 भर्ती परीक्षाओं को रद्द कर दिया था। इसके साथ ही 23 अन्य परीक्षाओं की जांच के आदेश भी दिए गए थे। सरकार का यह फैसला भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और छात्रों के लंबे समय से चल रहे आंदोलन के बीच आया था।

सरकार के फैसले के बाद सफल अभ्यर्थियों में नाराजगी बढ़ गई थी। उनका कहना था कि बिना उनकी गलती साबित हुए परीक्षा और नियुक्तियां रद्द कर दी गईं। इसी के खिलाफ अभ्यर्थियों की ओर से झारखंड हाईकोर्ट में याचिकाएं दाखिल की गईं।

गुरुवार को हाईकोर्ट में हुई सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं की ओर से दलील दी गई कि परीक्षा और नियुक्तियां रद्द करने से पहले प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया। अभ्यर्थियों का कहना था कि अगर किसी परीक्षा में गड़बड़ी हुई है तो उसकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, लेकिन बिना सबूत सफल अभ्यर्थियों को इसका खामियाजा नहीं भुगतना चाहिए।

JPSC परीक्षा में जांच को लेकर उठे सवाल

याचिकाकर्ताओं की ओर से अदालत में यह भी कहा गया कि परीक्षा की कॉपियां जांचने के लिए जिन नियमों का पालन किया जाना चाहिए था, उसमें विशेषज्ञों की भूमिका से जुड़े सवाल हैं। इसके अलावा TDPL नाम की बाहरी कंपनी को OMR स्कैनिंग और संबंधित काम दिए जाने को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं।

याचिकाकर्ताओं के वकील ने अदालत को बताया कि सरकार के हलफनामे में भी कुछ प्रक्रियागत मुद्दों को स्वीकार किया गया है। अब सरकार को मामले में अपना जवाब दाखिल करने के लिए 15 दिन का समय दिया गया है।

सफल अभ्यर्थियों ने फैसले को बताया राहत

सरकार के आदेश से प्रभावित सफल अभ्यर्थियों ने हाईकोर्ट के फैसले का स्वागत किया है। एक अभ्यर्थी ने कहा कि उसने मेहनत और परीक्षा पास करने के बाद नौकरी हासिल की थी, लेकिन एक दिन में बिना किसी व्यक्तिगत गलती के उसकी नियुक्ति रद्द कर दी गई। अभ्यर्थियों का कहना है कि यदि किसी स्तर पर गड़बड़ी हुई है तो जिम्मेदार लोगों की पहचान कर कार्रवाई की जानी चाहिए।

छात्रों की ओर से लंबे समय से JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता और निष्पक्ष जांच की मांग की जा रही थी। करीब एक महीने चले आंदोलन के बाद छात्रों ने बुधवार को अपना आंदोलन फिलहाल स्थगित कर सरकार को अपनी मांगों पर कार्रवाई के लिए दो महीने का समय दिया था।

सरकार ने क्यों रद्द की थीं परीक्षाएं?

हेमंत सोरेन सरकार ने भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं को लेकर कार्रवाई का फैसला किया था। सरकार ने JSSC-CGL परीक्षा के साथ-साथ TDPL द्वारा 2014 से आयोजित की गई परीक्षाओं को भी रद्द करने की घोषणा की थी। इसके अलावा JPSC की कुछ परीक्षाओं और बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने तथा भर्ती प्रक्रिया में सुधार के लिए समिति गठित करने की बात कही गई थी।

सरकार का कहना था कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करना जरूरी है और किसी भी तरह की गड़बड़ी से योग्य अभ्यर्थियों के हित प्रभावित नहीं होने दिए जाएंगे। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पहले भी परीक्षा व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की बात कह चुके हैं।

हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब सरकार को अदालत के सामने अपना पक्ष रखना होगा। मामले में आगे की सुनवाई के दौरान जांच रिपोर्ट, परीक्षा प्रक्रिया और नियुक्तियों को रद्द करने के आधार पर विस्तार से विचार किया जाएगा।

तथ्य जांच:

  • झारखंड हाईकोर्ट ने सरकार के 22 भर्ती परीक्षाएं रद्द करने के आदेश पर रोक लगाई है।
  • सरकार ने 18 अगस्त 2026 को 22 परीक्षाएं रद्द करने का आदेश जारी किया था।
  • 23 अन्य परीक्षाओं की जांच के आदेश भी दिए गए थे।
  • 11वीं और 13वीं JPSC परीक्षाओं और उनसे जुड़ी नियुक्तियों को रद्द करने का फैसला भी हाईकोर्ट में चुनौती दी गई थी।
  • सफल अभ्यर्थियों ने सरकार के फैसले के खिलाफ याचिकाएं दाखिल की थीं।
  • याचिकाकर्ताओं ने प्राकृतिक न्याय का पालन नहीं किए जाने का आरोप लगाया।
  • अदालत ने सरकार को अपना जवाब दाखिल करने के लिए 15 दिन का समय दिया है।
  • झारखंड में JPSC-JSSC परीक्षाओं को लेकर छात्रों का आंदोलन करीब एक महीने तक चला था।
  • छात्रों ने बुधवार को आंदोलन स्थगित कर सरकार को अपनी मांगों पर कार्रवाई के लिए दो महीने का समय दिया था।

निष्कर्ष

JPSC और अन्य भर्ती परीक्षाओं को रद्द करने के झारखंड सरकार के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक से सफल अभ्यर्थियों को फिलहाल बड़ी राहत मिली है। अदालत अब यह देखेगी कि परीक्षाओं और नियुक्तियों को रद्द करने के लिए सरकार के पास पर्याप्त आधार और जांच रिपोर्ट है या नहीं। दूसरी ओर, सरकार को 15 दिन में अपना जवाब दाखिल करना है। इस मामले की आगे की सुनवाई से झारखंड के हजारों अभ्यर्थियों के भविष्य को लेकर स्थिति और स्पष्ट होगी।

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