PM मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ बयान पर CJP के आशुतोष रांका का पलटवार, सरकारी स्कूलों की बदहाली पर उठाए सवाल

NRC News Hindi: PM मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ बयान पर CJP के आशुतोष रांका का पलटवार, सरकारी स्कूलों की बदहाली पर उठाए सवाल

बड़ी खबर: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के स्वतंत्रता दिवस संबोधन में ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर CJP के आशुतोष रांका ने प्रतिक्रिया दी है। जयपुर में रांका ने सरकारी स्कूलों की स्थिति और गांवों में बच्चों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि आजादी के 80 साल बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले बच्चे बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं और सरकारी स्कूलों की स्थिति किसी से छिपी नहीं है।

दिनांक: 16 अगस्त 2026
स्थान: जयपुर, राजस्थान

आशुतोष रांका ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए शिक्षा व्यवस्था की स्थिति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि देश की आजादी को 80 साल हो चुके हैं, लेकिन गांवों में रहने वाले बच्चों को अभी भी बुनियादी सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है।

रांका ने सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों में बच्चों की शिक्षा और स्कूलों में उपलब्ध सुविधाओं पर ध्यान देने की जरूरत है।

उन्होंने दावा किया कि पिछले कुछ वर्षों में देश में 95 हजार स्कूल बंद हुए हैं। उन्होंने राजस्थान में 10 हजार और उत्तर प्रदेश में 30 हजार स्कूल बंद किए जाने की कोशिश का भी दावा किया। ये आंकड़े आशुतोष रांका के बयान के तौर पर सामने आए हैं और इन्हें स्वतंत्र रूप से सत्यापित सरकारी आंकड़ा नहीं माना जाना चाहिए।

आशुतोष रांका ने कहा कि उनकी संस्था की ओर से सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने के लिए अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने लोगों से अपने-अपने क्षेत्रों के सरकारी स्कूलों का दौरा करने की अपील की।

उन्होंने कहा कि आम लोगों को स्कूलों की स्थिति देखने के साथ स्थानीय सरपंच और प्रशासनिक अधिकारियों से मिलकर समस्याओं की शिकायत करनी चाहिए। उनके मुताबिक, सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज की भी इसमें भूमिका होनी चाहिए।

रांका ने यह भी कहा कि देश की बड़ी आबादी अभी भी गांवों में रहती है। ऐसे में ग्रामीण बच्चों को बेहतर शिक्षा और सुविधाएं उपलब्ध कराना देश के भविष्य के लिए जरूरी है।

यह बयान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 15 अगस्त के स्वतंत्रता दिवस संबोधन के बाद आया है। पीएम मोदी ने अपने भाषण में कहा था कि सशस्त्र नक्सलवाद कमजोर हो चुका है, लेकिन ‘दिमागी नक्सल’ जैसी विचारधारा से भी सतर्क रहने की जरूरत है।

इस बयान को लेकर विपक्ष और विभिन्न सामाजिक कार्यकर्ताओं की ओर से प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। वहीं, सरकार की ओर से यह स्पष्ट किया गया है कि प्रधानमंत्री की टिप्पणी विपक्षी नेताओं को निशाना बनाने के लिए नहीं थी।

तथ्य जांच:

  • आशुतोष रांका ने PM मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ वाले बयान पर प्रतिक्रिया दी है।
  • रांका ने सरकारी स्कूलों की स्थिति और ग्रामीण बच्चों की बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा उठाया।
  • उन्होंने देश में पिछले कुछ वर्षों में 95 हजार स्कूल बंद होने का दावा किया।
  • राजस्थान में 10 हजार और उत्तर प्रदेश में 30 हजार स्कूल बंद होने की कोशिश का भी उन्होंने दावा किया।
  • इन स्कूलों से जुड़े आंकड़ों को यहां रांका के दावे के रूप में ही प्रस्तुत किया गया है।
  • रांका ने सरकारी स्कूलों को बेहतर बनाने के लिए अभियान चलाने की बात कही।
  • उन्होंने लोगों से अपने क्षेत्र के सरकारी स्कूलों का दौरा करने की अपील की।
  • PM मोदी ने 15 अगस्त के भाषण में ‘दिमागी नक्सल’ शब्द का इस्तेमाल किया था।
  • इस बयान के बाद राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं।
  • मामले में स्कूलों की स्थिति और शिक्षा सुविधाओं को लेकर बहस भी तेज हुई है।

निष्कर्ष:

PM मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ बयान के बाद CJP के आशुतोष रांका ने सरकारी स्कूलों की स्थिति को लेकर सवाल उठाए हैं। उन्होंने ग्रामीण बच्चों को बेहतर बुनियादी सुविधाएं देने और सरकारी स्कूलों को मजबूत करने की जरूरत बताई। रांका ने लोगों से अपने क्षेत्र के स्कूलों का दौरा कर समस्याओं को प्रशासन के सामने उठाने की अपील भी की है।

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