बड़ी खबर: तृणमूल कांग्रेस के 20 बागी सांसदों को सुप्रीम कोर्ट ने नोटिस जारी किया है। यह कार्रवाई TMC के राष्ट्रीय महासचिव और लोकसभा सांसद अभिषेक बनर्जी की ओर से दाखिल याचिका पर हुई है। याचिका में बागी सांसदों की अयोग्यता से जुड़े मामले में लोकसभा स्पीकर की ओर से फैसला लेने में हो रही देरी को चुनौती दी गई थी। सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई के बाद TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि यह अभी शुरुआत है और इसके बाद बागी विधायकों का नंबर आएगा।
सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ ने अभिषेक बनर्जी की याचिका पर सुनवाई की। याचिका में आरोप लगाया गया है कि TMC छोड़कर नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हुए 20 सांसदों के खिलाफ दायर अयोग्यता याचिकाओं पर समय पर फैसला नहीं लिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने मामले में संबंधित बागी सांसदों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि संवैधानिक पद पर बैठे अधिकारी से जुड़े मामले में आदेश देने से पहले संबंधित पक्ष का जवाब सुनना जरूरी है।
कल्याण बनर्जी ने कहा- यह सिर्फ शुरुआत है
सुप्रीम कोर्ट की कार्रवाई के बाद TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा कि अभिषेक बनर्जी ने संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दाखिल की थी। उन्होंने कहा कि बागी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हो चुकी है।
कल्याण बनर्जी ने संकेत दिया कि पार्टी अब बागी विधायकों के खिलाफ भी कार्रवाई की दिशा में आगे बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि सांसदों के बाद अगला नंबर बागी विधायकों का होगा।
20 बागी सांसदों का मामला क्या है?
TMC के 20 सांसदों पर पार्टी छोड़कर NCPI में शामिल होने और पार्टी से अलग राजनीतिक गतिविधियों में शामिल होने के आरोप हैं। TMC की ओर से इनके खिलाफ अयोग्यता की मांग की गई है।
अभिषेक बनर्जी की याचिका में आरोप लगाया गया कि लोकसभा स्पीकर के सामने अयोग्यता से संबंधित मामले लंबित हैं और इस पर जल्द फैसला होना चाहिए। इसी मामले में अब सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित सांसदों से जवाब मांगा है।
लोकसभा स्पीकर ने भी मांगा जवाब
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला की ओर से पक्ष रखा। उन्होंने अदालत को बताया कि स्पीकर ने मामले में प्रक्रिया शुरू कर दी है और 20 बागी सांसदों से जवाब मांगा गया है।
सुनवाई के दौरान पीठ में शामिल जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने टिप्पणी की कि संवैधानिक पद पर बैठे अधिकारियों को मामलों में समय पर फैसला लेना चाहिए।
TMC और बागी सांसदों के बीच बढ़ी राजनीतिक लड़ाई
TMC में बगावत का यह मामला पिछले कुछ समय से लगातार चर्चा में है। पार्टी की ओर से बागी सांसदों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है, जबकि दूसरी तरफ बागी सांसदों ने अलग राजनीतिक रास्ता अपनाया है।
इस विवाद के बीच कल्याण बनर्जी पहले भी बागी सांसदों के खिलाफ सार्वजनिक रूप से हमला बोल चुके हैं। जुलाई में उन्होंने संसद परिसर में 20 बागी सांसदों के खिलाफ प्रदर्शन भी किया था।
अब सुप्रीम कोर्ट की ओर से नोटिस जारी होने के बाद TMC और बागी सांसदों के बीच कानूनी लड़ाई और तेज होने की संभावना है।
बागी विधायकों पर भी नजर
कल्याण बनर्जी के बयान से साफ संकेत मिल रहा है कि TMC अब सांसदों के बाद बागी विधायकों के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी में है। हालांकि, फिलहाल सुप्रीम कोर्ट का ताजा नोटिस 20 बागी सांसदों से संबंधित है।
बागी विधायकों के खिलाफ पार्टी आगे क्या कानूनी या संवैधानिक कदम उठाती है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा।
तथ्य जांच:
- सुप्रीम कोर्ट ने TMC के 20 बागी सांसदों को नोटिस जारी किया है।
- कार्रवाई अभिषेक बनर्जी की ओर से दाखिल याचिका पर हुई है।
- याचिका में सांसदों की अयोग्यता पर फैसला लेने में देरी का मुद्दा उठाया गया है।
- संबंधित सांसदों पर TMC छोड़कर NCPI में शामिल होने का आरोप है।
- लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने भी बागी सांसदों से जवाब मांगा है।
- सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने लोकसभा स्पीकर की ओर से सुप्रीम कोर्ट में पक्ष रखा।
- कल्याण बनर्जी ने कहा कि सांसदों के बाद बागी विधायकों का नंबर आ सकता है।
- सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों को सुनने के बाद आगे की कार्रवाई करने की प्रक्रिया शुरू की है।
निष्कर्ष
TMC के 20 बागी सांसदों को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस मिलने के बाद पार्टी और बागी नेताओं के बीच विवाद अब कानूनी मोर्चे पर पहुंच गया है। अभिषेक बनर्जी की याचिका पर हुई सुनवाई के बाद अदालत ने सांसदों से जवाब मांगा है। वहीं कल्याण बनर्जी के बयान से संकेत मिला है कि TMC बागी विधायकों के खिलाफ भी कार्रवाई की तैयारी कर रही है। आने वाली सुनवाई में इस मामले की दिशा और स्पष्ट होगी।
