मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार भूमध्यरेखीय प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से काफी तेजी से बढ़ रहा है। अमेरिकी मौसम एजेंसी NOAA और कई अंतरराष्ट्रीय जलवायु मॉडल इस बात के संकेत दे रहे हैं कि 2026 में एल नीनो बेहद मजबूत रूप ले सकता है। कुछ मॉडल इसे “सुपर एल नीनो” की श्रेणी में पहुंचने की संभावना जता रहे हैं।
एल नीनो एक प्राकृतिक जलवायु घटना है, जिसमें प्रशांत महासागर का पानी सामान्य से ज्यादा गर्म हो जाता है। इसका सीधा असर दुनियाभर के मौसम पैटर्न पर पड़ता है। भारत में इसका सबसे बड़ा प्रभाव दक्षिण-पश्चिम मानसून पर पड़ता है, जो देश की लगभग 70 प्रतिशत बारिश का स्रोत है।
भारतीय मौसम विभाग और निजी एजेंसी स्काइमेट पहले ही 2026 में सामान्य से कम मानसून की आशंका जता चुके हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक इस साल मानसून सामान्य औसत का लगभग 92 प्रतिशत रह सकता है। अगर एल नीनो और मजबूत होता है तो अगस्त और सितंबर में बारिश की भारी कमी देखने को मिल सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र, कर्नाटक और मध्य भारत के कई हिस्सों में सूखे जैसी स्थिति बन सकती है। वहीं दूसरी ओर चेन्नई और तमिलनाडु के कुछ तटीय इलाकों में अत्यधिक बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है।
सुपर एल नीनो का असर सिर्फ मौसम तक सीमित नहीं रहेगा। कृषि उत्पादन, बिजली आपूर्ति, खाद्य कीमतें और अर्थव्यवस्था पर भी इसका गहरा असर पड़ सकता है। कमजोर मानसून के कारण धान, दालें, गन्ना और तिलहन जैसी फसलें प्रभावित हो सकती हैं। इससे खाद्य महंगाई बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि एल नीनो के साथ बढ़ते ग्लोबल वार्मिंग प्रभाव मिलकर 2026 को रिकॉर्ड तोड़ गर्म वर्ष बना सकते हैं। इससे देश में हीटवेव के दिनों की संख्या और अवधि दोनों बढ़ सकती हैं। पहले ही कई राज्यों में तापमान 45 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है।
2015-16 के सुपर एल नीनो के दौरान भारत में कई राज्यों में सूखा पड़ा था जबकि चेन्नई में भीषण बाढ़ आई थी। अब वैज्ञानिकों को डर है कि 2026 की स्थिति उससे भी ज्यादा गंभीर हो सकती है।
तथ्य जांच:
- 2026 में संभावित “सुपर एल नीनो” को लेकर वैज्ञानिकों ने चेतावनी जारी की है
- एल नीनो भारत के मानसून और तापमान को गंभीर रूप से प्रभावित कर सकता है
- IMD और स्काइमेट ने सामान्य से कमजोर मानसून की आशंका जताई है
- कई राज्यों में सूखा और कुछ तटीय इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है
- कृषि उत्पादन और खाद्य कीमतों पर बड़ा असर पड़ने की संभावना है
निष्कर्ष: संभावित सुपर एल नीनो भारत के लिए बड़ी मौसमीय चुनौती बन सकता है। भीषण गर्मी, कमजोर मानसून, सूखा और बाढ़ जैसी स्थितियां देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जिंदगी दोनों को प्रभावित कर सकती हैं। अब सरकार और मौसम एजेंसियों की नजर लगातार बदलते जलवायु संकेतों पर बनी हुई है।
