दिल्ली में NEET अभ्यर्थी ने दी जान, सुसाइड नोट में माता-पिता से मांगी माफी

NRC News Hindi: दिल्ली में NEET अभ्यर्थी ने दी जान, सुसाइड नोट में माता-पिता से मांगी माफी

बड़ी खबर: दिल्ली के दक्षिण-पश्चिम जिले के पालम इलाके में रहने वाली एक NEET अभ्यर्थी ने कथित तौर पर आत्महत्या कर ली। मौके से मिले सुसाइड नोट में छात्रा ने अपने माता-पिता से माफी मांगी और उनकी उम्मीदों पर खरा न उतर पाने की बात लिखी। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, छात्रा परीक्षा रद्द होने के बाद मानसिक तनाव से जूझ रही थी।

दिनांक: 17 जून 2026
स्थान: पालम, नई दिल्ली

जानकारी के अनुसार, छात्रा रेणु ने 3 मई को NEET परीक्षा दी थी। परीक्षा रद्द होने और दोबारा परीक्षा की प्रक्रिया के बाद वह कथित रूप से तनाव और अवसाद की स्थिति में थी। घटना 13 जून को हुई, जब वह घर पर अकेली थी।

रिपोर्ट के मुताबिक, छात्रा के पिता पारिवारिक कारणों से रिश्तेदारी में गए हुए थे। इसी दौरान रेणु ने कथित रूप से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस को घटनास्थल से एक हस्तलिखित सुसाइड नोट मिला, जिसमें उसने अपने माता-पिता से क्षमा मांगी थी।

पुलिस ने बताया कि मामले की जांच की गई है और अब तक किसी प्रकार की साजिश या उकसावे के संकेत नहीं मिले हैं। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।

यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब NEET-UG 2026 से जुड़े विवादों और पुनर्परीक्षा को लेकर देशभर में छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य पर चिंता व्यक्त की जा रही है। हाल के दिनों में दिल्ली, देहरादून और अन्य स्थानों से भी परीक्षा तनाव से जुड़े दुखद मामले सामने आए हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए मानसिक स्वास्थ्य सहायता, पारिवारिक सहयोग और समय पर काउंसलिंग बेहद जरूरी है।

तथ्य जांच:

  • पालम क्षेत्र की NEET अभ्यर्थी रेणु ने कथित तौर पर आत्महत्या की।
  • छात्रा ने सुसाइड नोट में माता-पिता से माफी मांगी थी।
  • वह परीक्षा रद्द होने के बाद मानसिक तनाव में बताई जा रही थी।
  • पुलिस को अब तक किसी साजिश या उकसावे के संकेत नहीं मिले हैं।
  • घटना ने छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ा दी है।

निष्कर्ष:

दिल्ली के पालम में हुई यह दुखद घटना प्रतियोगी परीक्षाओं के दबाव और छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर गंभीर सवाल खड़े करती है। मामले की जांच पूरी की जा रही है, जबकि विशेषज्ञ छात्रों को भावनात्मक और मनोवैज्ञानिक सहयोग उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं।

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