बंगाल की वोटर लिस्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे अधीर रंजन चौधरी, 27 लाख नाम हटाने का दावा

NRC News Hindi: बंगाल की वोटर लिस्ट मामले में सुप्रीम कोर्ट पहुंचे अधीर रंजन चौधरी, 27 लाख नाम हटाने का दावा

बड़ी खबर: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अधीर रंजन चौधरी ने पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से लाखों नाम हटाए जाने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका (PIL) दायर की है। याचिका में दावा किया गया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के दौरान लगभग 27 लाख मतदाताओं के नाम बिना उचित प्रक्रिया अपनाए हटा दिए गए।

दिनांक: 28 जून 2026
स्थान: नई दिल्ली

याचिका में आरोप लगाया गया है कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया मनमाने ढंग से अपनाई गई। अधीर रंजन चौधरी का दावा है कि केवल मुर्शिदाबाद जिले में ही करीब 5 लाख मतदाताओं के नाम मामूली वर्तनी की गलती या पते में छोटी त्रुटियों के आधार पर हटा दिए गए, जिससे बड़ी संख्या में लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

याचिका में यह भी कहा गया है कि मतदाता सूची से नाम हटने के कारण अनेक गरीब और जरूरतमंद लोग राशन, वृद्धावस्था पेंशन तथा अन्य सरकारी कल्याणकारी योजनाओं के लाभ से भी वंचित हो रहे हैं। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की मांग की गई है।

अधीर रंजन चौधरी ने अदालत से अपील की है कि मतदाता सूची से जुड़े मामलों की सुनवाई और आदेशों के लिए एक पारदर्शी डिजिटल पोर्टल बनाया जाए। साथ ही लंबित मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए पर्याप्त संख्या में कार्यरत या सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की नियुक्ति की जाए। याचिका के अनुसार, वर्तमान व्यवस्था में मामलों के निपटारे में कई वर्ष लग सकते हैं।

फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है। मामले पर अदालत की सुनवाई और चुनाव आयोग का विस्तृत पक्ष सामने आना अभी बाकी है।

तथ्य जांच:

  • अधीर रंजन चौधरी ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है।
  • याचिका में लगभग 27 लाख मतदाताओं के नाम हटाने का दावा किया गया है।
  • मुर्शिदाबाद में करीब 5 लाख नाम हटाए जाने का आरोप लगाया गया है।
  • याचिका में पारदर्शी डिजिटल पोर्टल और अतिरिक्त न्यायाधिकरण बनाने की मांग की गई है।
  • मामले में सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई और आगे की न्यायिक प्रक्रिया अभी शेष है।

निष्कर्ष:

पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची को लेकर विवाद अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। याचिका में बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम हटाने और उससे आम लोगों को होने वाली परेशानियों का मुद्दा उठाया गया है। अब इस मामले में अंतिम स्थिति अदालत की सुनवाई और संबंधित पक्षों की दलीलों के बाद ही स्पष्ट होगी।

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