बड़ी खबर: मध्य प्रदेश के कान्हा टाइगर रिजर्व में केनाइन डिस्टेंपर वायरस (CDV) का खतरा लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले दो महीनों में इस वायरस की चपेट में आने से 7 बाघों की मौत हो चुकी है, जिससे वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों की चिंता बढ़ गई है।
जानकारी के अनुसार, हाल ही में मुक्की क्वॉरेंटाइन सेंटर में उपचार के दौरान एक और बाघ की मौत हो गई। यह बाघ 4 जून को किसली परिक्षेत्र के संदूक खोल क्षेत्र में गंभीर रूप से बीमार अवस्था में मिला था, जिसके बाद उसे रेस्क्यू कर इलाज के लिए भर्ती कराया गया था। शुरुआती जांच में उसमें केनाइन डिस्टेंपर वायरस के लक्षण पाए गए थे।
रिपोर्ट के मुताबिक, इससे पहले सरही परिक्षेत्र की बाघिन टी-141 और उसके चार शावकों की भी इसी संक्रमण के कारण मौत हो चुकी है। कुछ ही दिनों के भीतर हुई इन मौतों ने टाइगर रिजर्व प्रबंधन के सामने गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है।
वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि संक्रमित बाघों के उपचार में कान्हा टाइगर रिजर्व की टीम, नानाजी देशमुख पशु चिकित्सा एवं विज्ञान विश्वविद्यालय तथा वाइल्ड लाइफ कंजर्वेशन ट्रस्ट (WCT) के विशेषज्ञ शामिल थे। लगातार निगरानी और उपचार के बावजूद संक्रमित बाघों को बचाया नहीं जा सका।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह वायरस सामान्यतः पालतू और आवारा कुत्तों में पाया जाता है। आशंका जताई जा रही है कि संक्रमित कुत्तों के संपर्क या साझा जल स्रोतों के माध्यम से यह संक्रमण बाघों तक पहुंचा हो सकता है। इसी वजह से रिजर्व के आसपास कुत्तों की निगरानी और टीकाकरण अभियान तेज किया गया है।
राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) और वन विभाग ने पूरे रिजर्व क्षेत्र में अलर्ट जारी कर दिया है। 100 से अधिक बाघों की विशेष निगरानी की जा रही है ताकि संक्रमण के प्रसार को रोका जा सके।
तथ्य जांच:
निष्कर्ष:
कान्हा टाइगर रिजर्व में केनाइन डिस्टेंपर वायरस का प्रकोप वन्यजीव संरक्षण के लिए गंभीर चुनौती बन गया है। लगातार हो रही बाघों की मौतों ने विशेषज्ञों और वन अधिकारियों की चिंता बढ़ा दी है। अब संक्रमण को रोकने और शेष बाघों की सुरक्षा के लिए व्यापक निगरानी और रोकथाम उपायों पर जोर दिया जा रहा है।
