भारतीय मौसम विभाग के अनुसार दक्षिण-पश्चिम मानसून ने 4 जून को केरल में प्रवेश कर लिया है। सामान्य तौर पर मानसून 1 जून के आसपास केरल पहुंचता है, लेकिन इस बार इसका आगमन करीब तीन दिन देरी से हुआ। इसके बावजूद मौसम विभाग का कहना है कि आने वाले दिनों में मानसून की प्रगति तेज हो सकती है।
IMD के मुताबिक अगले दो से तीन दिनों में मानसून तमिलनाडु, कर्नाटक, गोवा, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ सकता है। मौसम की परिस्थितियां मानसून के विस्तार के लिए अनुकूल बनी हुई हैं।
दिल्ली-एनसीआर के लिए मौसम विभाग ने हल्की बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं की संभावना जताई है। हालांकि दिल्ली में मानसून के आधिकारिक आगमन में अभी कुछ समय लग सकता है। सामान्य रूप से मानसून जून के अंतिम सप्ताह में दिल्ली पहुंचता है।
उत्तर प्रदेश और बिहार में भी प्री-मानसून गतिविधियां बढ़ने की संभावना है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार पूर्वी भारत में मानसून की रफ्तार बनी रही तो बिहार में जून के दूसरे सप्ताह और पूर्वी उत्तर प्रदेश में उसके बाद मानसून पहुंच सकता है। फिलहाल कई इलाकों में गरज-चमक के साथ बारिश के आसार बने हुए हैं।
मौसम विभाग ने यह भी चेतावनी दी है कि इस वर्ष एल नीनो के प्रभाव के कारण मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है। जून महीने में देश के कई हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा होने की आशंका जताई गई है। इससे कृषि और जल संसाधनों पर असर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि मानसून भारत की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है क्योंकि देश की लगभग 70 प्रतिशत वार्षिक वर्षा इसी अवधि में होती है। खेती, जलाशयों और बिजली उत्पादन पर मानसून का सीधा प्रभाव पड़ता है।
तथ्य जांच:
- 4 जून 2026 को केरल में मानसून का आधिकारिक आगमन हो चुका है
- मानसून सामान्य तिथि से लगभग तीन दिन देर से पहुंचा है
- अगले कुछ दिनों में दक्षिण भारत के अन्य राज्यों में विस्तार की संभावना है
- दिल्ली-एनसीआर में बारिश और आंधी की संभावना जताई गई है
- एल नीनो के कारण इस वर्ष सामान्य से कम वर्षा का अनुमान लगाया गया है
निष्कर्ष: केरल में मानसून की एंट्री के साथ देश में वर्षा ऋतु की औपचारिक शुरुआत हो चुकी है। अब उत्तर प्रदेश, बिहार और दिल्ली समेत उत्तर भारत के राज्यों को मानसून का इंतजार है। आने वाले दिनों में मौसम की गतिविधियों पर सभी की नजर बनी रहेगी।
