बड़ी खबर: CJP के 'चलो संसद' प्रदर्शन के दौरान सोशल मीडिया पर वायरल हुए उस दावे को दिल्ली पुलिस ने पूरी तरह खारिज कर दिया, जिसमें कहा गया था कि पुलिस ने एक महिला और 12 वर्षीय बच्ची के साथ मारपीट की। पुलिस ने स्पष्ट किया कि वायरल पोस्ट भ्रामक और तथ्यहीन है तथा लोगों से अपील की कि बिना पुष्टि ऐसी खबरें साझा न करें।
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हुई थी, जिसमें दावा किया गया कि CJP के संसद मार्च के दौरान पुलिस ने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की पत्नी गीतांजलि आंगमो के साथ मारपीट की और कई प्रदर्शनकारी घायल हुए। दिल्ली पुलिस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ऐसी कोई घटना नहीं हुई और वायरल संदेश गलत जानकारी फैलाने के उद्देश्य से साझा किया जा रहा है।
दिल्ली पुलिस ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था की गई थी। पुलिस ने लोगों से अपील की कि वे अफवाहों और अपुष्ट सोशल मीडिया पोस्ट पर भरोसा न करें तथा केवल आधिकारिक जानकारी पर विश्वास करें।
वहीं CJP की ओर से पहले पुलिस पर बल प्रयोग और प्रदर्शनकारियों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप लगाए गए थे। हालांकि पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन को नियंत्रित करने के दौरान महिला या बच्ची के साथ मारपीट की वायरल कहानी सही नहीं है। दोनों पक्षों के दावों के बीच घटना को लेकर बहस जारी है।
तथ्य जांच:
- दिल्ली पुलिस ने महिला और बच्ची से मारपीट के वायरल दावों को फर्जी और भ्रामक बताया।
- पुलिस ने लोगों से अपुष्ट सोशल मीडिया पोस्ट साझा न करने की अपील की।
- CJP ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस पर बल प्रयोग के आरोप लगाए थे।
- मामले को लेकर पुलिस और CJP के दावे अलग-अलग हैं।
निष्कर्ष:
CJP संसद मार्च के दौरान महिला और बच्ची के साथ कथित मारपीट को लेकर वायरल दावों का दिल्ली पुलिस ने आधिकारिक रूप से खंडन किया है। पुलिस का कहना है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित जानकारी भ्रामक है और लोगों को केवल सत्यापित सूचनाओं पर ही भरोसा करना चाहिए।
