बड़ी खबर: संसद मार्च और जंतर-मंतर प्रदर्शन के बीच केंद्र सरकार ने पहली बार Cockroach Janta Party (CJP) के प्रतिनिधियों से औपचारिक बातचीत की। केंद्रीय मंत्री एवं भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका से मुलाकात की। बैठक में CJP ने अपनी प्रमुख मांगें सरकार के सामने रखीं, लेकिन धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे सहित किसी भी मांग पर तत्काल सहमति नहीं बनी।
करीब चार घंटे चली बैठक में CJP प्रतिनिधियों ने सरकार के सामने तीन प्रमुख मांगें रखीं—सोनम वांगचुक की तत्काल रिहाई, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा और NEET अभ्यर्थियों की आत्महत्या करने वाले परिवारों को एक-एक करोड़ रुपये का मुआवजा। CJP नेताओं ने बताया कि जेपी नड्डा ने इन मांगों पर सरकार के शीर्ष नेतृत्व से चर्चा करने के लिए समय मांगा है।
बैठक के बाद जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार और CJP के बीच बातचीत सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई। उन्होंने प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वे धरना समाप्त करें और सामान्य स्थिति बहाल करने में प्रशासन का सहयोग करें। नड्डा ने बताया कि CJP की ओर से उन्हें लिखित ज्ञापन भी सौंपा गया है, जिस पर सरकार उचित स्तर पर विचार करेगी।
वहीं CJP प्रवक्ता सौरव दास ने कहा कि सरकार ने उनकी बातें सुनी हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस आश्वासन या प्रतिबद्धता नहीं दी गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जब तक प्रमुख मांगें पूरी नहीं होतीं, आंदोलन पूरी तरह समाप्त नहीं होगा। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि सरकार की ओर से आश्वासन मिला है कि जंतर-मंतर पर आगे कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी।
इस बीच संसद के बाहर हुए प्रदर्शन के बाद दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। संसद मार्च के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प भी हुई थी, जिसके बाद सरकार ने वार्ता का रास्ता अपनाया।
तथ्य जांच:
- जेपी नड्डा ने CJP प्रतिनिधियों से औपचारिक बातचीत की।
- CJP ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे सहित तीन प्रमुख मांगें सरकार के सामने रखीं।
- सरकार ने मांगों पर तत्काल कोई निर्णय या आश्वासन नहीं दिया।
- नड्डा ने प्रदर्शन समाप्त कर सामान्य स्थिति बहाल करने की अपील की।
निष्कर्ष:
सरकार और CJP के बीच पहली औपचारिक वार्ता से संवाद का रास्ता जरूर खुला है, लेकिन प्रमुख मांगों पर अभी सहमति नहीं बन सकी है। ऐसे में आंदोलन का अगला चरण सरकार के फैसले पर निर्भर करेगा।
