बांके बिहारी मंदिर के चढ़ावे पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- दान की रकम में हेराफेरी नहीं होने देंगे

NRC News Hindi: बांके बिहारी मंदिर के चढ़ावे पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, कहा- दान की रकम में हेराफेरी नहीं होने देंगे

बड़ी खबर: वृंदावन के श्री बांके बिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं के चढ़ावे और दान की रकम को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सख्त रुख अपनाया। अदालत ने कहा कि श्रद्धालुओं की ओर से दिया गया दान सीधे भगवान के खजाने में जाना चाहिए और चढ़ावे की रकम में किसी तरह की हेराफेरी या चोरी नहीं होने दी जाएगी। कोर्ट ने मंदिर में दान की पूरी व्यवस्था को पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के निर्देश दिए हैं।

दिनांक: 25 अगस्त 2026
स्थान: वृंदावन, मथुरा, उत्तर प्रदेश

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि मंदिर में श्रद्धालुओं की ओर से दिया गया एक-एक पैसा पहले मंदिर के आधिकारिक खाते या खजाने में जमा होना चाहिए। इसके लिए दान पेटियों और मंदिर के आधिकारिक ऑनलाइन माध्यमों से प्राप्त रकम को सीधे मंदिर के खाते में पहुंचाने की व्यवस्था बनाने को कहा गया है।

अदालत ने कहा कि मंदिर से जुड़े सेवायत, पुजारी या कोई अन्य व्यक्ति श्रद्धालुओं की ओर से दी गई दान राशि को अपने पास नहीं रख सकता। पहले पूरी रकम मंदिर के खजाने में जमा होगी और उसके बाद ही नियमों के अनुसार संबंधित लोगों को उनका हिस्सा मिल सकेगा।

मंदिर की दान व्यवस्था में पारदर्शिता के निर्देश

चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ के सामने मंदिर की व्यवस्था की निगरानी कर रही हाई पावर कमेटी की स्टेटस रिपोर्ट पेश की गई। वरिष्ठ अधिवक्ता मनिंदर सिंह ने कोर्ट को मंदिर से जुड़ी कुछ तस्वीरें भी दिखाई और व्यवस्था में गंभीर समस्याओं का मुद्दा उठाया।

मामले को गंभीरता से लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर की मैनेजमेंट कमेटी को ऐसी व्यवस्था तैयार करने का निर्देश दिया, जिसमें मंदिर में आने वाले प्रत्येक दान का पूरा रिकॉर्ड रखा जाए और रकम में किसी तरह की गड़बड़ी की गुंजाइश न रहे।

दान रोकने की कोशिश पर कोर्ट की चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट ने सेवायतों और अन्य संबंधित लोगों को भी स्पष्ट चेतावनी दी है। अदालत ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति दान की रकम को मंदिर के खजाने तक पहुंचने से रोकने या निर्धारित व्यवस्था में बाधा डालने की कोशिश करता है तो इसे गंभीरता से लिया जाएगा।

कोर्ट ने यह भी कहा कि श्रद्धालु द्वारा दिया गया दान भगवान के लिए है और उस पर सबसे पहला अधिकार भगवान का है। मंदिर की दान व्यवस्था में किसी भी तरह की अनियमितता को रोकना जरूरी है।

मंदिर की संपत्ति खरीदने पर भी सुप्रीम कोर्ट की नजर

सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर के फंड से संपत्ति खरीदने के प्रस्तावों को लेकर भी महत्वपूर्ण निर्देश दिया है। अदालत ने कहा कि यदि मंदिर के पैसे से किसी संपत्ति को खरीदने का प्रस्ताव आता है तो इसकी जानकारी सुप्रीम कोर्ट को दी जानी चाहिए।

अदालत की अनुमति के बाद ही मंदिर के फंड से ऐसी संपत्ति की खरीद का लेन-देन आगे बढ़ाया जा सकेगा।

मंदिर की व्यवस्था को लेकर पहले से चल रहा मामला

बांके बिहारी मंदिर की व्यवस्था से जुड़ा मामला पहले से सुप्रीम कोर्ट में चल रहा है। मंदिर के प्रबंधन, धार्मिक परंपराओं, भीड़ प्रबंधन और दैनिक व्यवस्था को लेकर अदालत समय-समय पर निर्देश देती रही है। मई 2026 में भी सुप्रीम कोर्ट ने मंदिर की व्यवस्था संभाल रही समिति से गोस्वामियों के सुझावों पर विचार करने और पारंपरिक धार्मिक प्रथाओं को बेहतर तरीके से बनाए रखने की दिशा में कदम उठाने को कहा था।

अब दान और चढ़ावे की रकम को लेकर दिए गए ताजा निर्देशों से मंदिर की वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने पर जोर दिया गया है।

तथ्य जांच:

  • मामला वृंदावन के श्री बांके बिहारी मंदिर में श्रद्धालुओं के दान और चढ़ावे से जुड़ा है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने 25 अगस्त 2026 को मामले में अहम निर्देश दिए।
  • कोर्ट ने दान की रकम को सीधे मंदिर के खाते या खजाने में जमा कराने की व्यवस्था बनाने को कहा।
  • दान पेटियों और आधिकारिक ऑनलाइन माध्यमों से प्राप्त रकम का पूरा हिसाब रखने का निर्देश दिया गया।
  • सेवायत, पुजारी या कोई अन्य व्यक्ति दान की रकम अपने पास नहीं रख सकता।
  • मंदिर के फंड से संपत्ति खरीदने के प्रस्ताव पर सुप्रीम कोर्ट की अनुमति जरूरी होगी।
  • मंदिर की मैनेजमेंट कमेटी को दान व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने को कहा गया।
  • सुप्रीम कोर्ट ने दान की रकम में हेराफेरी को गंभीरता से लेने की चेतावनी दी है।

निष्कर्ष

बांके बिहारी मंदिर के चढ़ावे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि श्रद्धालुओं की ओर से दिया गया दान सीधे मंदिर के खजाने में पहुंचना चाहिए और उसकी पूरी निगरानी व हिसाब-किताब होना चाहिए। अदालत के ताजा निर्देशों का उद्देश्य मंदिर की वित्तीय व्यवस्था में पारदर्शिता बढ़ाना और दान की रकम के संभावित दुरुपयोग को रोकना है।

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