बीजिंग में हुई इस अहम बैठक के दौरान ताइवान का मुद्दा दोनों देशों के बीच सबसे संवेदनशील विषय बनकर सामने आया। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि ताइवान चीन-अमेरिका संबंधों का सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील मुद्दा है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि इस मुद्दे को सही तरीके से नहीं संभाला गया तो दोनों देशों के बीच टकराव या संघर्ष की स्थिति पैदा हो सकती है।
दरअसल चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि ताइवान खुद को स्वतंत्र लोकतांत्रिक सरकार के रूप में देखता है। अमेरिका आधिकारिक तौर पर “वन चाइना पॉलिसी” को मानता है, लेकिन वह ताइवान को हथियार भी उपलब्ध कराता है। इसी वजह से बीजिंग लगातार अमेरिका के खिलाफ नाराजगी जताता रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक हाल ही में अमेरिका की ओर से ताइवान को बड़े रक्षा सौदे और हथियार देने की चर्चा तेज हुई है। चीन का कहना है कि अमेरिका की ऐसी गतिविधियां क्षेत्रीय स्थिरता को नुकसान पहुंचा सकती हैं। शी जिनपिंग ने ट्रंप से कहा कि ताइवान मुद्दे पर कोई भी गलत कदम पूरे चीन-अमेरिका रिश्तों को “बेहद खतरनाक स्थिति” में पहुंचा सकता है।
हालांकि तनाव के बीच दोनों नेताओं ने बातचीत में सहयोग की भी बात की। ट्रंप ने शी जिनपिंग को “महान नेता” बताते हुए कहा कि अमेरिका और चीन का भविष्य शानदार हो सकता है। वहीं शी जिनपिंग ने कहा कि दोनों देशों को प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि साझेदार बनकर आगे बढ़ना चाहिए।
बैठक के दौरान व्यापार, ईरान युद्ध, यूक्रेन संकट और वैश्विक अर्थव्यवस्था जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। अमेरिकी बिजनेस जगत के कई बड़े चेहरे भी ट्रंप के साथ बीजिंग पहुंचे। इनमें टेस्ला के एलन मस्क और एनवीडिया के जेनसन हुआंग जैसे नाम शामिल रहे। ()
ताइवान को लेकर चीन पहले भी कई बार सैन्य अभ्यास और चेतावनी जारी कर चुका है। पिछले कुछ वर्षों में चीन ने ताइवान के आसपास सैन्य गतिविधियां काफी बढ़ा दी हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर अमेरिका और चीन के बीच तनाव और बढ़ता है तो इसका असर पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र पर पड़ सकता है।
निष्कर्ष: ताइवान मुद्दे पर चीन और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर खुलकर सामने आ गया है। शी जिनपिंग की सख्त चेतावनी ने साफ कर दिया है कि बीजिंग इस मुद्दे पर किसी भी तरह का समझौता करने के मूड में नहीं है। अब दुनिया की नजरें अमेरिका की अगली रणनीति और चीन की प्रतिक्रिया पर टिकी हुई हैं।
