जयपुर में शुरू हुआ ‘स्मार्ट AC मिशन’, अब एयर कंडीशनर बचाएंगे बिजली

NRC News Hindi: जयपुर में शुरू हुआ ‘स्मार्ट AC मिशन’, अब एयर कंडीशनर बचाएंगे बिजली

बड़ी खबर: राजस्थान की राजधानी जयपुर में बढ़ती बिजली मांग को नियंत्रित करने और बिजली बचाने के लिए ‘स्मार्ट AC मिशन’ शुरू किया गया है। इस परियोजना के तहत शहर के करीब 2000 घरों में विशेष IoT (इंटरनेट ऑफ थिंग्स) आधारित डिवाइस लगाई जाएंगी, जो एयर कंडीशनर की बिजली खपत को स्मार्ट तरीके से नियंत्रित करेंगी। यह देश में अपनी तरह की पहली पहल मानी जा रही है।

दिनांक: 24 जून 2026
स्थान: जयपुर, राजस्थान

जानकारी के अनुसार, इस पायलट प्रोजेक्ट के तहत वैशाली नगर, मानसरोवर और मालवीय नगर क्षेत्रों के चयनित घरों में स्मार्ट IoT डिवाइस मुफ्त में लगाई जा रही हैं। इन डिवाइसों का उद्देश्य पीक ऑवर्स के दौरान बिजली की खपत को कम करना और ग्रिड पर पड़ने वाले दबाव को घटाना है।

रिपोर्ट के मुताबिक, यह तकनीक एसी को बंद नहीं करती, बल्कि जरूरत पड़ने पर उसके तापमान में लगभग 1 डिग्री सेल्सियस का मामूली बदलाव करती है। इससे उपभोक्ताओं को खास अंतर महसूस नहीं होगा, लेकिन बिजली की खपत में 3 से 6 प्रतिशत तक कमी लाई जा सकेगी।

इस परियोजना में उपयोग होने वाली डिवाइस वाई-फाई के जरिए ग्रिड प्रबंधन प्रणाली से जुड़ी रहती है और रियल टाइम में बिजली उपयोग की निगरानी करती है। बिजली की मांग बढ़ने पर सिस्टम स्वतः एसी की ऊर्जा खपत को नियंत्रित कर देता है।

अधिकारियों का दावा है कि यदि 2000 एसी इस तकनीक से जुड़ जाते हैं तो पीक ऑवर्स में लगभग 1 मेगावाट तक बिजली मांग कम की जा सकती है। इससे बिजली वितरण व्यवस्था पर दबाव घटेगा और उपभोक्ताओं के बिजली बिल में भी राहत मिलने की संभावना है।

तथ्य जांच:

• जयपुर में ‘स्मार्ट AC मिशन’ के तहत 2000 घरों में IoT डिवाइस लगाई जा रही हैं।
• यह देश में अपनी तरह की पहली पायलट परियोजना बताई जा रही है।
• तकनीक से बिजली खपत में 3 से 6 प्रतिशत तक कमी संभव है।
• परियोजना का उद्देश्य पीक ऑवर्स में बिजली मांग कम करना है।
• सफल होने पर इसे अन्य क्षेत्रों में भी विस्तार दिया जा सकता है।

निष्कर्ष:

जयपुर का ‘स्मार्ट AC मिशन’ बिजली बचत और स्मार्ट ग्रिड प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि यह पायलट प्रोजेक्ट सफल रहता है, तो भविष्य में इसे राजस्थान के अन्य शहरों में भी लागू किया जा सकता है, जिससे उपभोक्ताओं और बिजली वितरण प्रणाली दोनों को लाभ मिलेगा।

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