जीतू पटवारी का CM मोहन यादव पर बड़ा हमला, जमीन खरीद मामले में उठाए सवाल

NRC News Hindi: जीतू पटवारी का CM मोहन यादव पर बड़ा हमला, जमीन खरीद मामले में उठाए सवाल

बड़ी खबर: मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार से जुड़े कथित भूमि खरीद मामले को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि मुख्यमंत्री के परिवार और उनसे जुड़ी कंपनियों ने उज्जैन में बड़े पैमाने पर जमीन खरीदी है। वहीं भाजपा ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और राजनीतिक बताया है।

दिनांक: 24 जून 2026
स्थान: भोपाल, मध्य प्रदेश

जानकारी के अनुसार, जीतू पटवारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि वर्ष 2021 से 2025 के बीच मुख्यमंत्री के परिवार द्वारा बड़ी मात्रा में भूमि खरीदी गई। कांग्रेस का आरोप है कि खरीदी गई कई जमीनें उन क्षेत्रों में स्थित हैं जहां बाद में विकास परियोजनाओं और सड़क निर्माण की घोषणाएं हुईं।

रिपोर्टों के मुताबिक, कांग्रेस ने मामले की जांच सुप्रीम कोर्ट के किसी वर्तमान या सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में कराने की मांग की है। पार्टी का कहना है कि मुख्यमंत्री को इन आरोपों पर सार्वजनिक रूप से जवाब देना चाहिए।

वहीं भाजपा ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री और उनके परिवार की घोषित संपत्तियों में कोई अनियमित वृद्धि नहीं हुई है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने आरोपों को "बेबुनियाद" बताते हुए कहा कि कांग्रेस भ्रम फैलाने की कोशिश कर रही है।

मुख्यमंत्री के परिवार से जुड़े लोगों ने भी आरोपों का खंडन किया है। उनका कहना है कि वे लंबे समय से रियल एस्टेट व्यवसाय से जुड़े हैं और भूमि खरीद-बिक्री उनकी वैध व्यावसायिक गतिविधियों का हिस्सा है।

तथ्य जांच:

• जीतू पटवारी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार की भूमि खरीद को लेकर सवाल उठाए हैं।
• कांग्रेस ने न्यायिक जांच और मुख्यमंत्री से स्पष्टीकरण की मांग की है।
• भाजपा ने आरोपों को राजनीतिक और निराधार बताया है।
• परिवार की ओर से भी सभी आरोपों का खंडन किया गया है।
• मामला मध्य प्रदेश की राजनीति में बड़ा विवाद बनता जा रहा है।

निष्कर्ष:

मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनके परिवार की कथित भूमि खरीद को लेकर कांग्रेस और भाजपा आमने-सामने हैं। एक ओर विपक्ष न्यायिक जांच की मांग कर रहा है, वहीं भाजपा आरोपों को राजनीति से प्रेरित बता रही है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा मध्य प्रदेश की राजनीति में और अधिक चर्चा का विषय बन सकता है।

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