भारत-यूके FTA से खुला बड़ा मौका, UK की सड़कों पर दौड़ेंगी मारुति, टाटा और महिंद्रा की EVs

NRC News Hindi: भारत-यूके FTA से खुला बड़ा मौका, UK की सड़कों पर दौड़ेंगी मारुति, टाटा और महिंद्रा की EVs

बड़ी खबर: भारत और यूनाइटेड किंगडम (UK) के बीच हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) के बाद भारतीय ऑटोमोबाइल कंपनियों के लिए बड़ा अवसर खुल गया है। अब मारुति सुजुकी, टाटा मोटर्स और महिंद्रा जैसी कंपनियां अपनी मेड-इन-इंडिया इलेक्ट्रिक गाड़ियों (EVs) को ब्रिटेन के बाजार में निर्यात करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ा रही हैं।

दिनांक: 22 जून 2026
स्थान: नई दिल्ली

जानकारी के अनुसार, भारत-यूके व्यापक आर्थिक और व्यापार समझौता (CETA) 15 जुलाई 2026 से लागू होने जा रहा है। इसके तहत भारत में बनी इलेक्ट्रिक, हाइब्रिड और हाइड्रोजन से चलने वाली यात्री गाड़ियों को चरणबद्ध कोटा प्रणाली के तहत UK में ड्यूटी-फ्री प्रवेश मिलेगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, समझौते के छठे वर्ष से भारतीय कंपनियां बिना कस्टम ड्यूटी के UK में गाड़ियों का निर्यात कर सकेंगी। शुरुआती कोटा 17,600 वाहनों का होगा, जो बढ़ते-बढ़ते 15वें वर्ष में 88,000 वाहनों तक पहुंच जाएगा।

महिंद्रा एंड महिंद्रा ने इसे भारतीय EV उद्योग के लिए सकारात्मक अवसर बताया है। कंपनी का कहना है कि UK एक बड़ा राइट-हैंड-ड्राइव बाजार है और वह वहां अपनी इलेक्ट्रिक SUV रेंज के विस्तार की संभावनाओं का अध्ययन कर रही है।

वहीं मारुति सुजुकी ने कहा है कि भारत वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए पूरी तरह सक्षम है। कंपनी पहले ही अपनी इलेक्ट्रिक SUV eVITARA का यूरोप में निर्यात शुरू कर चुकी है और UK उसके प्रमुख बाजारों में शामिल है।

टाटा मोटर्स ने भी इस समझौते को टिकाऊ परिवहन (Sustainable Mobility) की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया है। कंपनी के अनुसार यह समझौता भारतीय EV उद्योग को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद करेगा।

तथ्य जांच:

  • भारत-यूके FTA 15 जुलाई 2026 से लागू होने वाला है।
  • भारतीय EVs को UK में चरणबद्ध तरीके से ड्यूटी-फ्री प्रवेश मिलेगा।
  • शुरुआती कोटा 17,600 वाहनों का होगा, जो 88,000 तक बढ़ेगा।
  • मारुति, टाटा और महिंद्रा UK बाजार में अवसर तलाश रही हैं।
  • समझौते से भारतीय EV उद्योग के वैश्विक विस्तार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

निष्कर्ष:

भारत-यूके FTA भारतीय ऑटोमोबाइल उद्योग, खासकर इलेक्ट्रिक वाहन क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। इससे भारतीय कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में नई पहचान मिलने के साथ-साथ ‘Make in India for the World’ अभियान को भी मजबूती मिलने की उम्मीद है। 

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