बड़ी खबर: भारत में पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण (E20) को बढ़ावा देने के लिए गन्ने से एथेनॉल बनाने की प्रक्रिया तेजी से अपनाई जा रही है। एथेनॉल एक जैव ईंधन (Biofuel) है, जिसे गन्ने के रस, शीरे (Molasses) और अन्य कृषि उत्पादों से तैयार किया जाता है। इसका उपयोग पेट्रोल में मिलाकर ईंधन आयात पर निर्भरता कम करने और प्रदूषण घटाने के लिए किया जा रहा है।
एथेनॉल बनाने की प्रक्रिया गन्ने की कटाई से शुरू होती है। सबसे पहले गन्ने से रस निकाला जाता है या चीनी उत्पादन के बाद बचने वाले शीरे (Molasses) का उपयोग किया जाता है। इसके बाद किण्वन (Fermentation) प्रक्रिया के जरिए शर्करा को अल्कोहल में बदला जाता है। फिर डिस्टिलेशन (Distillation) और शुद्धिकरण के बाद ईंधन ग्रेड एथेनॉल तैयार किया जाता है। अंत में इस एथेनॉल को पेट्रोल में 20 प्रतिशत तक मिलाकर E20 पेट्रोल बनाया जाता है।
सरकार का उद्देश्य एथेनॉल मिश्रण बढ़ाकर कच्चे तेल के आयात पर खर्च कम करना, किसानों की आय बढ़ाना और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। एथेनॉल उत्पादन में गन्ने के अलावा मक्का, चावल और अन्य कृषि उत्पादों का भी उपयोग किया जा सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार E20 ईंधन से कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है और देश की ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होती है। हालांकि E20 का उपयोग उन्हीं वाहनों में किया जाना चाहिए जो इस मिश्रित ईंधन के लिए अनुकूल (Compatible) हों।
तथ्य जांच:
- E20 पेट्रोल में 20% एथेनॉल और 80% पेट्रोल होता है।
- एथेनॉल गन्ने के रस, शीरे और अन्य कृषि उत्पादों से बनाया जाता है।
- एथेनॉल उत्पादन की मुख्य प्रक्रिया किण्वन और डिस्टिलेशन पर आधारित होती है।
- सरकार का लक्ष्य ईंधन आयात कम करना और किसानों की आय बढ़ाना है।
निष्कर्ष:
गन्ने से एथेनॉल और फिर E20 पेट्रोल तैयार करने की प्रक्रिया भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। इससे न केवल पर्यावरण को लाभ मिलने की उम्मीद है, बल्कि किसानों और देश की अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिल सकती है।
